जिंदगी का संघर्ष (भाग 11- एक रहस्य)
प्रतीक घर की अलमारी में कुछ ढूंढ रहा था। सामान इधर-उधर हटाते वक्त अचानक उसकी नजर पिता सुजल की एक पुरानी डायरी पर पड़ी। प्रतीक ने कपटी उंगलियों से उसे डायरी को खोला। पन्ना पलटते ही उसकी नजर पहली लाइन पर पड़ी-और उसका दिल जोर से धड़क उठा। उसे एक लाइन ने जैसे उसके मन में हलचल मचा दी। एक अजीब सी घबराहट के मारे उसने तुरंत डायरी बंद की और चुपचाप उसे वापस वही रख दिया। उसे सच का पूरा सामना करने की हिम्मत अभी उसमें नहीं थी। कुछ महीनो बाद.... सुजल के जाने के बाद अनुकंपा के आधार पर प्रतीक को सरकारी अध्यापक की नौकरी मिल गई और उसकी पोस्टिंग एक दूसरे स्कूल में हुई। कहने को तो परिवार को एक आर्थिक सहारा मिल गया था। लेकिन पिता को खोने के उसे गहरे दुख के सामने इस नौकरी की कोई खुशी नहीं थी। प्रतीक उम्र और तजुर्बे के उस मोड़ पर था जहाँ वह खुद इतना समझदार नहीं हुआ था कि पूरे घर का बोझ उठा सके। लेकिन हालात ने उसके कंधों पर एक बड़ी जिम्मेदारी डाल दी थी। मन में कई झिझक ओर घबराहटे थी,फिर भी उसने खुद को संभाला,और चुपचाप नई जिम्मेदारियों को स्वीकार कर लिया- केवल अपने परिवार को संभालने के लिए। आगे जानन...