जिंदगी का संघर्ष ( भाग 9- अंतिम सांसें और टूटता विश्र्वास)
और पारो भी अपने पिता के पास ही रहती थी। नैना भी उससे मिलने आती थी लेकिन वह अंधविश्वासी थी। एक रात 7 बजे सुजल बैठा था उसके पास उसका पूरा परिवार था बहने भाई और उनकी बेटियां सब थे और अचानक उसकी तबियत खराब होने लगी वह बहकी बहकी बाते करने लगा मनु उसे ऐसे देखकर रोने लगी पूरी रात सभी उसी के पास थे प्रतीक ओर मनु ने बहुत कहा इन्हें अस्पताल ले जाते है लेकिन किसी ने उनकी बात पर गौर नहीं किया सुबह सुजल को अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां उनसे कहा गया कि या तो इन्हें गर ले जाइए या बड़े अस्पताल।सुजल को फिर घर ले आए अब सुजल बस लेटे हुए हाथ पैर हिला रहा था न ही तो आंखे खोल रहा था और न ही कुछ बोल रहा था ।सभी उसके पलंग के पास बैठे हुए थे और मनु पलग के पास नीचे लेट गई । जब से सुजल बीमार हुआ था तब से मनु सही से सो नहीं पाती थी इतने दिनों की थकान के कारण उसे नींद आ गई लेकिन पारो उसके पिता के पास ही बैठी थी वह सबकुछ देख रही थी कि उसकी बुआ अंधविश्वास के कारण क्या क्या कर रही है कि उसकी पिता की मृत्यु आसानी से हो जाए।फिर पारो ने देखा कि उसके पिता की सांसे जोर से चलने लगी और अचानक रुक गई नैना ने इशारा किया कि सुजल अब नहीं रहा पारो की आंखों से सुबह से आंसू आ रहे थे लेकिन पिता की मृत्यु का पता चलते ही उसने सबसे पहले मनु को जगाया नैना ने तो मना किया था पर पारो ने उसकी बात को टाल दिया मनु उठते ही जोर से रोने लगी।पारो की तबियत खराब न हो जाए उसे एक कमरे में ले कर गई उसकी बहन और फिर सुजल को बिस्तर से नीचे जमीन पर लेटाया गया फिर पारो भी पिता के पास आई और फिर गाँव के लोग आए और क्रम विधि से उसका अंतिम संस्कार किया गया।
सुजल के परिवार का क्या हाल होगा क्या वह खुद को सम्भाल पाएंगे?
आगे क्या होगा जानने के लिए मुझे फॉलो करे और भाग कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताएं।
भाग 10 शाम 7 बजे।
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