जिंदगी का संघर्ष (भाग 1 एक नई शुरुआत)

यह कहानी समर्पित है उन सभी संघर्षशील राहियों के नाम जो जिंदगी के हर तूफान में मुस्कुराकर चलना जानते है।

और सुजल मनु के उस अटूट हौसले का जो हर मुश्किल राह में भी हार नहीं मानता। 

यह कहानी है एक छोटे से गांव की, जहां एक गरीब परिवार था। उस परिवार में रहता था सुजल, जिसका बचपन कठिनाइयों से निकला वह जब एक परीक्षा देना चाहता था तब उसने पिता से कहा

सुजल - पिताजी मुझे कुछ पैसे चाहिए, मेरी पढ़ाई के लिए।

पिता -लेकिन सुजल तुम जानते हो हमारी आर्थिक स्थिति कैसी है , मेरे पास तुम्हें देने को पैसे नहीं है।

सुजल - तो पिताजी मेरे हिस्से मैं जो कुछ आता है बेच दो और मुझे वो परीक्षा देने दो

पिता - नहीं ऐसा कुछ नहीं हो सकता।

फिर सुजल वहां से दुखी होकर चला गया। वह मन ही मन कुछ सोच रहा था।

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भाग 2 शाम 7 बजे।
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