जिंदगी का संघर्ष (भाग 2-परिवार और दोस्ती)
कुछ दिनों बाद सुजल बाहर गया हुआ था, तो उसकी मुलाकात चेतन से हई। उन दोनों के बीच बातचीत शुरू हई और बातों बातों में पता चला कि चेतन भी वही परीक्षा देने वाला है
सुजल - तुम वह परीक्षा दे रहे हो?
चेतन - हां मैं काफी समय से यह चाहता था, और अब मैं वह परीक्षा देने वाला हूं
सुजल - मेरी इच्छा बहुत थी पर किसी वजह से मैं यह परीक्षा नहीं दे सकता हूं।
चेतन - कौन सी वजह?
सुजल - जाने दो ना अब।
चेतन - अब अपने भाई को भी नहीं बताओगे।
चेतन की यह बात सुनकर सुजल को वह स्नेह मिला जो उसके सगे भाइयों से भी नहीं मिला। फिर सुजल ने चेतन को वह बात बताई, और जैसा की चेतन ने कहा था उसने भाई का कर्तव्य निभाया।
चेतन - तुम फिकर मत करो तुम्हे परीक्षा के लिए पैसे मै दूंगा।
सुजल - लेकिन!
चेतन - लेकिन वेकिन कुछ नहीं तुमने मुझे भाई कहा है, इसलिए दे रहा हूं। और तुम्हें अच्छा ना लगे तो जब कमाने लग जाओ तब दे देना।
सुजल - ठीक है जैसा तुम कहो।
चेतन और सुजल ने मन लगाकर पढ़ाई की और परीक्षा देकर वे पास हो गए। फिर सुजल घर के खर्चे उठाने के लिए गांव में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगा। वह कुछ पैसे घर दे देता और कुछ खुद की पढ़ाई में वह सरकारी अध्यापक बनना चाहता था वह दिल से कोशिश कर रहा था।
क्या सुजल सफल हो पाएगा? या उसकी जिंदगी में कुछ और तूफान आएगा।
जानने के लिए मुझे फॉलो करे भाग 3 शाम 7 बजे।
https://pratikshadairy.blogspot.com/2026/08/1.html
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