जिंदगी का संघर्ष (भाग 8 - प्रेम ओर त्याग )
समय के साथ चीजें ठीक होने लगी पर भावेश उसके हिस्से की जमीन को बेचने की बात करने लगा। लेकिन सुजल ने साफ मना कर दिया और कह दिया कि मैं मेरे पिता की जमीन नहीं बेचने दूंगा। भावेश ने हर मुमकिन कोशिश की पर कागजात न मिलने की वजह से उसका जमीन बेचने का प्रयास पूरी तरह नाकाम रहा। सुजल ने पिता के जाने के बाद पूरे परिवार को सम्भाल के रखा,पर कौन जानता था कि बहुत दूर का सोचना भी इंसान के लिए सही नहीं होता है।
सुजल के पिता की मृत्यु के कुछ महीने पहले ही सुजल को पता चल चुका था, की उसे एक गंभीर बीमारी है। सुजल को अक्सर लोग रोज मिलने आते थे। और सुजल के पिता हमेशा परिवार वालों से पूछते कि ये लोग क्यों आते हैं,पर किसी ने उन्हें सच नहीं बताया था। सुजल लोगो से अधिक लगाव रखता था। सुजल कभी किसी के भी काम को न नहीं कहता था। उसे चेतन और उसके बाकी सारे करीबी दोस्त मिलने आते थे।सुजल को पहले तो ये लगता था कि वह जल्दी ही ठीक हो जाएगा। उसने बहुत कोशिश की अच्छे से अच्छे अस्पताल में खुदका इलाज करवाया। और काफी हद तक उसकी तबियत ठीक हो गई थी और डॉक्टर ने भी कह दिया था कि उसका ऑपरेशन हो जाएगा और वो पहले जैसा ठीक हो जाएगा। लेकिन अचानक उसकी तबियत खराब हुई, डॉक्टर ने कहा कि अब इसका कोई इलाज नहीं हो सकता।मनु ने बहुत कहा कि हम अपनी सारी जमीन बेच देंगे लेकिन आप ठीक हो जाओ बस पर सुजल ने कहा कि तुम जानती हो एक लोन हमने पहले ही ले रखा है और मैं अगर बच पाता तो मैं दस क्या बीस लाख भी लगाने को तैयार हु पर मैं जानता हु मैं ठीक नहीं हो सकता तो क्यों फालतू में अपने परिवार के लिया मुसीबत छोड़ कर जाऊं।पर मनु बात मानने को तैयार ही नहीं थी उसने कहा किसी ओर अस्पताल चलते है,लेकिन सुजल ने कहा "मनु तुम चाहे कुछ भी कर लो आखिर में जीत मेरी ही होगी,तुम देख लेना मै जल्दी ही ये दुनिया छोड़कर चला जाऊगा"।सुजल की ये बात सुनकर मनु रोने लगी। प्रतीक भी अब घर आ गया था अपने पिता के पास ।
क्या सुजल ठीक हो पाएगा या किस्मत कुछ और खेल खेलकर जाएगी।
आगे क्या होगा जानने के लिए मुझे फॉलो करे और कहानी कैसी लगी कमेंट जरूर करे।भाग 9 शाम 7 बजे।
https://pratikshadiary.blogspot.com/2026/08/7.html
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