जिंदगी का संघर्ष (भाग 7- अंतिम विदा और नया सवेरा)

वक्त बीत रहा था। सुजल को भी काफी अच्छी तनख्वाह मिलने लगी थी अभी और पंकज की मौत को भी दो-तीन साल हो गए थे धीरे-धीरे पंकज की मौत के बारे में भूल रहे थे, की सुजल के पिता बीमार रहने लगे। सुजल ने उन्हें अस्पताल मैं दिखाया और समय पर दवाइयां दी पर कुछ खास असर नहीं हुआ। उनकी तबीयत और ज्यादा खराब रहने लगी। यहाँ तक की डॉक्टर ने भी कह दिया कि अब ये ज्यादा दिन नहीं रह पाएगे। उनकी तबीयत दिन दिन खराब हो रही थी पूरा परिवार उनकी सेवा कर रहा था।एक दिन सुजल के पिता को सब मिलने आये थे।भावेश की दोनों बेटियां ,पंकज की दोनों बेटियां ,सुजल की दोनों बहने भी। इतने लोगों की वजह से पारो पूरे दिन उसके दादाजी के पास नहीं जा पाई। फिर शाम को 6 बजे जब पारो अपने दादाजी के पास गई तो उन्होंने उसे पहचाने से इनकार कर दिया। इस बात से पारो को बहुत दुख हुआ ,वह अंदर ही अन्दर टूट गई। उसने सोचा कि दादाजी जिससे सबसे ज्यादा प्यार करते थे ,उसे ही भूल गए। पारो मन में ही रो रही थी कि उसने सुना कि उसके दादाजी की सांसे नहीं चल रही है। सुजल के पिता की मृत्यु हो गई। उनकी आत्मा ने इस दुनिया से विदा ले ली। जब सुजल की माता का देहांत हुआ था तब परवर में सुजल के पिता थे फैसले लेने के लिए। लेकिन अब गर में कोई बड़ा बुजुर्ग नहीं बचा।पिता के ऐसे चले जाने के बाद सब ग़म में होते है। लेकिन वो कहते है न जीवन में आगे बढ़ते रहना चाहिए,यही संसार का नियम है।
क्या होगा आगे क्या परिवार पहले जैसे खुश रह पाएगा।
जानने के लिए मुझे फॉलों करे।भाग 8 शाम 7 बजे।
https://pratikshadiary.blogspot.com/2026/08/6.html


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