यादों की छाँव (एक हिंदी कविता )
पापा, आपकी हँसी से मेरा हर ग़म मिट जाता था,
एक वक्त था जब मेरे सर पर तेरा साया था।
फिर कभी धूप भी लगती, तो सुकून आ जाता था,
आपके सहारे के बिना तो चला भी नहीं जाता था।
ज़िंदगी के हर तूफ़ान में, तेरा ही तो हौसला काम आता था,
दूर आपसे एक पल भी नहीं रहा जाता था।
आपका ख़याल ही तो मुझे हमेशा सताता था,
फिर भी आपकी यादों का दीप, मेरे दिल में सदा जगमगाता था।
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