एक पराया सा अपना स्कूल
"इमारत तो आज भी वही खड़ी है ज़िद्दी सी,
बस वो कल वाला हमारा बचपन कहीं खो गया..."
जिन गलियारों में कभी अपनेपन का हक हुआ करता था,
जहाँ कोई सुविधा ना होते हुए भी सब हुआ करता था।
अतीत में कहाँ खो गई वो टीचर की डाँट...
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